Cucumber Being Sold For Two Rupees A Kg In Mitouli Area – मितौली क्षेत्र में दो रुपये किलो बिक रहा खीरा

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चपरतला में लगा खीरे का ढेर।

चपरतला में लगा खीरे का ढेर।
– फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

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हैरमखेड़ा, बाइकुआं, रहजानियां, इछनापुर में सैकड़ों एकड़ में होती है खेती
लागत न निकल पाने से परेशान किसान बना रहे उपज बंद करने का मन

चपरतला। खीरे के दाम अचानक गिर जाने से खीरा किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। बाजार में दो रुपया किलो खीरा बिक रहा है, जिससे आहत किसान फसल न उगाने का मन बना रहे हैं।
मितौली तहसील के हैरमखेड़ा, बाइकुआं, रहजानियां, इछनापुर में सैकड़ों एकड़ भूमि पर खीरे की खेती की जाती है। इस बार खीरे का भाव इतना कम है कि किसानों की कमर टूट गई है। खीरा दो रुपये किलो बिक रहा है। इससे किसानों के सारे अरमानों पर पानी फिर गया है।
इस भाव में तो खाद बीज वालों का कर्जा उतारना भी मुश्किल हो रहा है। यहां दिल्ली गुड़गांव समेत अन्य मंडियों से आकर व्यापारी खरीदारी करते हैं, इस बार खरीदारी तो हो रही है लेकिन भाव कम होने के कारण किसानों की लागत डूब गई है। बाहर से आने वाले व्यापारियों ने बताया कि इस बार खीरे का भाव नहीं मिल रहा है क्योंकि मंडियों में खीरे की मांग नहीं है। खीरे से हर्बल प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। यह कंपनियां अभी पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं जिससे खीरे का भाव नहीं मिल पा रहा है। उधर, किसानों ने बताया की एक एकड़ खीरे में चालीस हजार की लागत आती है। इस बार लागत निकालना तो दूर केवल मजदूरी ही निकल जाए तो बड़ी बात होगी।

हैरमखेड़ा, बाइकुआं, रहजानियां, इछनापुर में सैकड़ों एकड़ में होती है खेती

लागत न निकल पाने से परेशान किसान बना रहे उपज बंद करने का मन

चपरतला। खीरे के दाम अचानक गिर जाने से खीरा किसानों को भारी घाटा उठाना पड़ रहा है। बाजार में दो रुपया किलो खीरा बिक रहा है, जिससे आहत किसान फसल न उगाने का मन बना रहे हैं।

मितौली तहसील के हैरमखेड़ा, बाइकुआं, रहजानियां, इछनापुर में सैकड़ों एकड़ भूमि पर खीरे की खेती की जाती है। इस बार खीरे का भाव इतना कम है कि किसानों की कमर टूट गई है। खीरा दो रुपये किलो बिक रहा है। इससे किसानों के सारे अरमानों पर पानी फिर गया है।

इस भाव में तो खाद बीज वालों का कर्जा उतारना भी मुश्किल हो रहा है। यहां दिल्ली गुड़गांव समेत अन्य मंडियों से आकर व्यापारी खरीदारी करते हैं, इस बार खरीदारी तो हो रही है लेकिन भाव कम होने के कारण किसानों की लागत डूब गई है। बाहर से आने वाले व्यापारियों ने बताया कि इस बार खीरे का भाव नहीं मिल रहा है क्योंकि मंडियों में खीरे की मांग नहीं है। खीरे से हर्बल प्रोडक्ट बनाए जाते हैं। यह कंपनियां अभी पूर्ण रूप से शुरू नहीं हो पाई हैं जिससे खीरे का भाव नहीं मिल पा रहा है। उधर, किसानों ने बताया की एक एकड़ खीरे में चालीस हजार की लागत आती है। इस बार लागत निकालना तो दूर केवल मजदूरी ही निकल जाए तो बड़ी बात होगी।

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